सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

VOTE EARTH :VOTE FOR EARTH THIS YEAR ON NOVEMBER 2020

शख्सियत : डेनिस एलन हायेस

Image result for pictures for earth's day 2020
Image result for pictures for earth's day 2020
Image result for pictures for earth's day 2020
Image result for pictures for earth's day 2020
Image result for pictures for earth's day 2020
Image result for pictures for earth's day 2020
Image result for pictures for earth's day 2020
Image result for pictures for earth's day 2020
Image result for pictures for earth's day 2020
Image result for pictures for earth's day 2020
Image result for pictures for earth's day 2020
Image result for pictures for earth's day 2020
Image result for pictures for earth's day 2020

उन्तीस अगस्त उन्नीस सौ चौवालिस को अमरीका के विस्कॉन्सिन राज्य में जन्में डेनिस एलन हायेस हमारे वक्त के एक नामचीन पर्यावरण विज्ञानी एवं पर्यावरण पारिस्थितिकी एक्टिविस्ट हैं आपने अपना सारा जीवन मानव -पारितंत्र ,उद्योगिक पारिस्थितिकी के बारे में जागरूकता पैदा करने में लगा दिया है। आप पृथ्वी दिवस त्यौहार के सह -जन्मदाता हैं।आप वैकल्पिक ऊर्जा मामलों के माहिर हैं।

आपने जिस महायज्ञ की शुरुआत की उसका ही  सहज प्रतिफल  था 'पृथ्वी दिवस'।बेशक इसके निमित्त बने एक अमरीकी सीनेटर।  पहला पृथ्वी पर्व २२ अप्रैल १९७० को मनाया गया। आज दुनियाभर  के तकरीबन एक सौ अस्सी मुल्क पृथ्वी के पर्यावरण ,पारितंत्रों ,हमारी हवा -पानी -मिट्टी की गुणवत्ता को बनाये रखने के महायज्ञ में अपनी -अपनी आहुति डाल रहें हैं तो इसका श्रेय आपको और सिर्फ आपको ही जाता है ।

अमरीकी  विश्वविद्यालयीय परिसरों में हमारी युवा भीड़ का ध्यान इस ओर  खींचने में आपका अप्रतिम योगदान रहा है। नारी विमर्श ,राजनीति आदि से युवा भीड़ को निकालकर पर्यावरण पारितंत्रों से जोड़ने वाली  हस्ती का नाम है हायेस।

वाशिंगटन राज्य के एक छोटे से कसबे कामास में आपका आरम्भिक लालन पालन हुआ।यहां के एक स्कूल का नाम आपके सम्मान में हायेस हाई स्कूल कामास रखा गया है।आपके पिता श्री कोलम्बिआ नदी के किनारे पर एक पेपर मिल में काम करते थे अत : आपने करीब से देखा कि कैसे इस उद्योग से निकला अपशिष्ट बिना उपचारित किये ही नदी के आँचल को गंदला रहा है यह भी, किस प्रकार यहां काम करने वाले मजदूर सुरक्षा गिअर के बिना ही काम करने को विवश हैं।

स्टैनफोर्ड विश्विद्यालय से आपने इतिहास विषय में ग्रेजुएशन ,(स्नातक) की उपाधि प्राप्त की।

 छात्र नेता के तौर पर विएतनाम युद्ध के दौरान एक सक्रीय पर्यावरण सचेत छात्र, एक समर्पित एक्टिविस्ट  की भूमिका निभाई। स्टेनफोर्ड लॉ  स्कूल से इसके बाद आपने वकालत की उपाधि प्राप्त की। इससे पूर्व आपने हारवर्ड यूनिवर्सिटी से जुड़े कैनेडी स्कूल ऑफ़ गवर्नमेंट में भी अध्ययन  किया था। सीनेटर  गेलॉर्ड के आवाहन पर आपने हार्वर्ड को छोड़ पृथ्वी दिवस पर्व को एक वार्षिक त्यौहार में तब्दील करने में विधाई भूमिका निभाई।आप पर्यावरण एडवोकेट हैं।

वर्ष २०२० के लिए आपकी मंशा बिलकुल दो टूक है:

 इस बरस जबकि तकरीबन ६५ अति महत्वपूर्ण चुनाव संपन्न होने हैं जिनमें अमरीकी राष्ट्रपति का चुनाव अहम माना जा रहा है। आपने आवाहन किया है उस मौके को (नवंबर ) फिर पृथ्वी दिवस में तब्दील किया जाए। आपका एक ही आवाहन है युवा भीड़ के लिए नारा है :वोट  अर्थ

उसी उम्मीदवार को युवा जिताएं -जो पर्यावरण को एक ऑर्गेनिज़्म एक जीवंत इकाई मानता हो ठीक रीढ़दार -स्तनपायी -आधुनिक- पशु 'होमोसैपिएंस' की तरह। हमारे वज़ूद से जुडी है पर्यावरण की नव्ज़ ,पर्यावरण पारिस्थितिकी के वज़ूद से जुड़ा है हमारा होना इज़्नेस। भले आलमी लोकडाउन के इस दौर में हम खुले में न मना पाएं पृथ्वी पर्व ,डिजिटल रूप पर कोई रोकटोक नहीं है। 

आप सौर ऊर्जा शोध संस्थान (लोकप्रिय नाम नेशनल रिन्यूएबल एनर्जी लेबोरेटरी )के अनेक बरसों तक मुखिया भी रह चुकें हैं।

वाशिंगटन की बुलिट फाउंडेशन का आपको १९९२ में अध्यक्ष बनाया गया आज आप एक प्रमुख यौद्धा गिने जाते हैं पर्यावरण और ऊर्जा नीति निर्धारण के।

सौर ऊर्जा पर एक किताब  पूरा लिखने के एवज में ही आपको रोबर्ट बोस्च अकादमी का फेलो बनाया गया।

आपका मानना है पृथ्वी को रहने लायक बनाये रखने के कारगर प्रयासों में हम पहले ही पच्चीस साल पिछड़ गए हैं।अब और अधिक देरी प्राणघातक साबित हो सकती है।

यह पर्यावरण आपादकाल है।

 बे -शक प्रचंड समुद्री तूफानों ,टाइफून ,हरिकेन आदिक को अब हम मुल्तवी नहीं कर सकते तो भी बहुत कुछ किया जा सकता है।

सब रास्ते कभी भी बंद नहीं होते एक रास्ता फिर भी खुला रहता है। हमारी इच्छा बलवती होनी चाहिए -जिन खोजा तिन पाइयाँ गहरे पानी पैठ .....

आप लेखक हैं किताब कौएद के। बेहतरीन जनसेवा के लिए आपको जेफरसन अवार्ड से नवाज़ा जा चुका है।  वर्ष १९९ ९ में अमरीकी साप्ताहिक पत्रिका ने आपको हीरो ऑफ़ दी प्लेनेट घोषित किया।

He is also the author of Cowed: The Hidden Impact of 93 Million Cows on America's Health, Economy, Politics, Culture, and Environment [1] and Rays of Hope. 

In Cowed, globally recognized environmentalists Denis and Gail Boyer Hayes offer a revealing analysis of how our beneficial, centuries-old relationship with bovines has evolved into one that now endangers us.


ISBN-13: 978-0393239942

https://www.youtube.com/watch?v=A-8MLhp-HPc


Denis Hayes
Denis Hayes 2000.jpg
Hayes in 2000
Born
Denis Allen Hayes

August 29, 1944 (age 75)[1]
Alma materStanford University
Kennedy School of Government
Stanford Law School
OccupationEnvironmental advocate
Known forCoordinating the first Earth Day,
founding the Earth Day Network, construction of the Bullitt Center
Denis Allen Hayes (born August 29, 1944)पृथ्वी दिवस पर विशेष 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Secrets of RSS Demystifying the Sangh(HINDI ALSO )

RSS volunteers at a camp in Shimla last year. आरएसएस संक्षिप्त रूप है राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का। संघ एक राष्ट्रीय सांस्कृतिक गैरराजनीतिक संगठन है अपने जन्म से ही। आज इससे संबद्ध समाज सेवी संस्थाओं का एक पूरा नेटवर्क इंटरनेट की तरह सारे भारत में देखा जा सकता है। इन संस्थाओं के पूरे नेटवर्क ,फैलाव- प्रसार को ही 'संघपरिवार 'कहा जाता है। यदि आप इसी संस्था के बारे में मानस प्रकाशन ,4402/5A ,Ansari Road (Opp. HDFC Bank ),Darya Ganj ,New -Delhi -110 -002 से प्रकाशित पुस्तक 'Secrets  of RSS Demystifying the Sangh ,लेखक रतन शारदा ,पढेंगे और भारतधर्मी समाज से आप गहरे जुड़े हैं आपकी धड़कनों में भारत की सर्वसमावेशी संस्कृति का थोड़ा सा भी अंश मौजूद है ,आप इस संस्था की सहनशीलता ,औदार्य और भारत राष्ट्र के एकत्व को बनाये रखने की इसकी जी जान से की गई कोशिश की तारीफ़ करने में कंजूसी नहीं बरतेंगे। काश इस संस्था का फैलाव आज़ादी से पहले आज जैसा व्यापक होता तो मुस्लिम लीग और लेफ्टिए  अखंड भारतवर्ष के विभाजन का प्रस्ताव पारित करने से पहले ज़रूर संकोच करते। अपने वर्तमान स्वरूप म...

भाव -सरणियाँ (क्षणिकाएं )

कौन है वह , जो दूज के चाँद सा मिला , देखते ही देखते पूर्ण चंद्र बना और  ईद का चाँद हो गया।   भाव -सरणियाँ (क्षणिकाएं )-१ 

'यही समय है, सही समय है'...पीएम मोदी ने लाल किले से पढ़ी युवाओं के लिए यह कविता पीएम मोदी ने देश की आजादी के 75वें दिवस के मौके पर युवा पीढ़ी पर खासा फोकस रखा। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि वह भविष्यदृष्टा नहीं लेकिन कर्म के फल पर विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा कि उनका देश के युवाओं पर विश्वास है। उन्होंने कहा कि उनका विश्वास देश की बहनों-बेटियों, देश के किसानों, देश के प्रोफेशनल्स पर है। ये 'कैन डु जनरेशन' है, ये हर लक्ष्य हासिल कर सकती है। 21वीं सदी में भारत के सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करने से कोई भी बाधा रोक नहीं सकती। इस दौरान पीएम मोदी ने अपने भाषण का अंत एक कविता सुनाकर किया। यह कविता कुछ इस तरह से है:

  'यही समय है, सही समय है'...पीएम मोदी ने लाल किले से पढ़ी युवाओं के लिए यह कविता एजेंसी,नई दिल्ली Published By: Priyanka Sun, 15 Aug 2021 09:15 AM पीएम मोदी ने देश की आजादी के 75वें दिवस के मौके पर युवा पीढ़ी पर खासा फोकस रखा। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि वह भविष्यदृष्टा नहीं लेकिन कर्म के फल पर विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा कि उनका देश के युवाओं पर विश्वास है। उन्होंने कहा कि उनका विश्वास देश की बहनों-बेटियों, देश के किसानों, देश के प्रोफेशनल्स पर है। ये 'कैन डु जनरेशन' है, ये हर लक्ष्य हासिल कर सकती है। 21वीं सदी में भारत के सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करने से कोई भी बाधा रोक नहीं सकती। इस दौरान पीएम मोदी ने अपने भाषण का अंत एक कविता सुनाकर किया। यह कविता कुछ इस तरह से है:  यही समय है, सही समय है, भारत का अनमोल समय है। असंख्य भुजाओं की शक्ति है, हर तरफ़ देश की भक्ति है, तुम उठो तिरंगा लहरा दो, भारत के भाग्य को फहरा दो यही समय है, सही समय है, भारत का अनमोल समय है। कुछ ऐसा नहीं जो कर ना सको, कुछ ऐसा नहीं जो पा ना सको, तुम उठ जाओ, तुम जुट जाओ, सामर्थ्य को अपने पहचानो, ...