सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

The 7 Chakras and Their Significance to Your Life

The 7 Chakras and Their Significance to Your Life Chakras are energy centers. Although most people have heard of seven chakras, there are actually 114 in the body. The human body is a complex energy form; in addition to the 114 chakras, it also has 72,000 “nadis,” or energy channels, along which vital energy, or “prana,” moves. When the nadis meet at different points in the body, they form a triangle. We call this triangle a chakra, which means “wheel.” We call it a wheel because it symbolizes growth, dynamism and movement, so even though it is actually a triangle, we call it a chakra. Some of these centers are very powerful, while others are not as powerful. At different levels, these energy centers produce different qualities in a human being. Fundamentally, any spiritual path can be described as a journey from the base chakra, called the “Mooladhara,” which is located at the base of the spine, to the “Sahasrar,” which located at the top of the head. This journey of moveme...

योग : सात चक्र से मेंटल सोलिडरिटी

योग : सात चक्र से मेंटल सोलिडरिटी(मानसिक समन्वय ),ऐक्य -भाव ,मन की एकजुटता  मनुष्य शरीर स्थित कुंडलिनी शक्ति में जो चक्र स्थित होते हैं उनकी संख्या कहीं छ: तो कहीं सात बताई गई है। इन चक्रों के विषय में अत्यंत महत्वपूर्ण जानकारी। समय-समय पर चक्रों वाले स्थान पर ध्यान दिया जाए तो मानसिक स्वास्थ्य और सुदृढ़ता प्राप्त की जा सकती है। (१ ). मूलाधार चक्र-  गुदा और लिंग के बीच चार पंखुरियों वाला 'आधार चक्र' है। आधार चक्र का ही एक दूसरा नाम मूलाधार चक्र भी है। वहां वीरता और आनंद का भाव का निवास करता है। उक्त स्थान पर ध्यान लगाने से यह प्राप्त किया जा सकता है। (२ ) स्वाधिष्ठान चक्र-  स्वाधिष्ठान चक्र लिंग मूल में है जिसकी छ: पंखुरियां हैं। इसके जाग्रत होने पर क्रूरता, गर्व, आलस्य, प्रमाद, अवज्ञा, अविश्वास आदि दुर्गणों का नाश होता है।  (३ ) मणिपुर चक्र-  नाभि में दस दल वाला मणिपुर चक्र है। इसके सक्रिय होने से तृष्णा, ईर्ष्या, चुगली, लज्जा, भय, घृणा, मोह, आदि कषाय-कल्मष दूर हो जाते हैं। (४ ) अनाहत चक्र-  हृदय स्थान में अनाहत चक्र है जो बारह पंखरि...

कुण्डलिनी ऊर्जा केंद्र :हमारे शरीर में कहाँ और कौन सा ऊर्जा केंद्र है ?

Search Results योग विद्या से ताल्लुक रखने वाली तमाम किताबें हमारे शरीर में ऊर्जा केंद्रों की बात करतीं हैं। ये ऊर्जा चक्र हमारे सूक्ष्म शरीर की निर्मिति करते हैं। हमारे चित्त को खुश या ग़मज़दा बनाते हैं कभी हम नाहक़ बिला -वजह ही बहुत प्रसन्न परमसन्तुष्ट दिखलाई देतें हैं और कभी उदास खुद से ही खफा -खफा तो ये सब किया धरा इन चक्रों का ही होता है जो या तो अवरुद्ध होतें हैं या अतिसक्रिय। इनकी तुलना कमल पुष्प और उसकी पंखुड़ियों से की गई है।  ये ही हमारे हाव -भावों ,अनुभावों ,मनोभावों की चाबी हैं लगाम हैं। हमारे शरीर के अंगों पर काबू या नियंत्रण ये ही चक्र रखते हैं। ये ही विभिन्न अंगों के समन्वयकर्ता कोऑर्डिनेटर हैं। समस्वरता समरसता सामंजस्य या फिर विषमस्वर असहमति यही रचते हैं।इनके असर से कमोबेश  हम सब वाकिफ हैं। ध्यान या योग की क्रिया करने वाले कुछ ज्यादा सामान्य आदमी थोड़ा सा कम. सिरदर्द हो या बदन दर्द ,अवसाद हो या चिड़चिड़ापन या  खिन्नता हाथ पैरों का स्वयं चालित संचालन इन्हीं ऊर्जा केंद्रों के पार्श्व प्रभाव के रूप में देखे समझे जा सकते हैं। य...